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एफआईआर के घेरे में भारतीय सेना

Posted On: 2 Feb, 2018 में

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आतंक और आतंकियों को अगर कश्मीर जैसे स्वर्ग जैसी नगरी को छुटकारा दिलाना है तो इसको जड़ से सफाया करना पड़ेगा,जिससे कि मानव जिंदगी को सुरक्षित बचाया जा सके, इसी वजूद को बचाने के लिए ही भारतीय सेना कश्मीर में संघर्ष कर रही है।आज जिस प्रकार की समस्या से भारतीय सेना जूझ रही है यह उसके लिए बहुत ही चुनौतीपूर्ण कार्य है, सेना को एक तरफ तो आतंकवादियों से लड़ना पड़ता है दूसरी तरफ ऐसे लोग है जो अपने होकर भी दुश्मन बने हुए है, ये ऐसे पत्थरबाज है जो सेना के कार्य में रोड़ा बन कर खड़े हो जाते है। उस समय सेना के लिए सबसे कठिन और संयम की घड़ी होती है जब आतंकियों से मुठभेड़ चल रही हो और उसी दौरान पत्थरबाज पत्थर बरसाने लगे, लेकिन फिर भी सेना अपना धैर्य बना कर रखती है वह पत्थर की मार खाकर भी गोली नहीं चलाती। सोचने वाली बात है कि जिसके पास एके-47 रखी हो उसके बाद भी वह पत्थर खा रहा हो, इसी बात से उस सैनिक के संयम का पता लग सकता है लेकिन कभी-कभी ये संयम भी जबाब दे जाता है जैसा कि शोपियां में हुआ, जब सेना के काफिले को पत्थरबाजो ने घेर लिया और सैनिकों पर पत्थरबाजी करने लगे, हद तो तब हो गयी जब ये हिंसक तरीके से सेना पर वार करने लगे जिसमें सेना का अधिकारी घायल भी हो गया,इस परिस्थिति में सेना क्या करती अपने आत्मरक्षार्थ कुछ तो कड़ा कदम उठाना ही पड़ता, सेना ने कड़ा कदम उठाया भी जिसमें 2 लोगों की मौत हो गयी। इस मौत के लिए राज्य सरकार ने सेना को दोषी माना और सेना के खिलाफ़ एफआईआर तक दर्ज करा दी, जिसमें सेना की कोई गलती नहीं फिर भी उसको दोषी माना जा रहा हो। सेना हो या कोई आम नागरिक अगर कोई उसके ऊपर कोई भी हमला करता है तो उसका जबाब तो देगा ही लेकिन सरकार ने सेना के खिलाफ़ एफआईआर करके एक तरह से सेना का मनोबल गिराने का काम किया है। सेना कोई भी कार्य ऐसा नहीं करना चाहती कि जिससे कि मानवीय धर्म का नुकसान हो फिर भी पत्थरबाजो के बार-बार के अनैतिक कार्य करने के कारण उसको कड़ा कदम उठाना पड़ता है। लेकिन आज सबसे बड़ा सवाल यह है क्या सेना पत्थरबाजो के हाथों मार खाती रहेगी और पत्थरबाज पत्थर बरसाते रहेंगे और सेना चुप मारकर मार खाती रहे। लेकिन आज अगर देखा जाय तो सेना आखिर कब तक पत्थर खाती रहेगी?क्या उसको इतना भी अधिकार नहीं है कि वह इन पत्थरबाजो का जबाब दे?और अगर जबाब देने का मन करे तो उसको एफआईआर के घेरे में ले लिया जाय। यह पूर्णतया गलत है जो नही होना चाहिए। *****************************************नीरज कुमार पाठक आईसीएआई नोएडा

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