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बही को सही करने की ज़रूरत

Posted On: 4 Jul, 2017 में

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एक देश के लिए चार्टर्ड एकाउंटेंट कितना महत्त्वपूर्ण होता है इस बात को वही ठीक ढंग से समझ सकता है जो अर्थ जगत में दिलचस्पी रखता हो।चार्टर्ड एकाउंटेंट देश की अर्थ व्यवस्था की रीढ़ होते है जो चाहे तो देश को बना भी सकते है या फिर उसको डूब भी सकते है। 1 जुलाई को अपने स्थापना के 68वें दिवस पर भारत के पीएम माननीय नरेन्द्र दामोदर दास मोदी को बतौर अतिथि निमंत्रित किया गया।पीएम ने चार्टर्ड एकाउंटेंट के 68वें स्थापना दिवस पर कई महत्वपूर्ण बातों को साझा करते हुए नसीहत भी दिया कि चार्टर्ड अकाउंटेंट का देश में क्या स्थान है और उनकी जिम्मेदारी क्या है। पीएम ने ये भी कहा कि अगर देश में टैक्स की चोरी होती रहेगी तो इससे देश की आर्थिक व्यवस्था को नुकसान पहुँचता रहेगा और इससे नुकसान गरीबों का ही होगा, आज के समय में अगर ईमानदारी से देखा जाय तो टैक्स चोरी का रास्ता एक सीए ही बनाता है और उससे किस प्रकार से बचा जाय इसका मार्ग दर्शन भी करता है। जहाँ तक टैक्स देने वाले कि बात करे तो वह कभी भी नहीं चाहेगा कि हम टैक्स दें या फिर ज्यादा दें हर आदमी कर देने से बचना चाहता है,जो कर देने योग्य है वो भी सरकार के दबाव में ही देते है। टैक्स देने या न देने का रास्ता भी एक चार्टर्ड एकाउंटेंट ही बता सकता है इसीलिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी उन्हीं की होती है,यही कारण रहा कि पीएम ने बार-बार एक सीए को कलम की ताक़त का याद दिलाते हुए यहां तक कह दिया कि आप के कलम की ताकत पीएम से भी ज्यादा होती है, लेकिन आज के समय में अगर देखा जाय तो कर की चोरी भारी पैमाने पर होती है अगर ईमानदारी पूर्वक लोग लोग कर देते रहे।बड़े आश्चर्य कि बात है कि देश में 2 करोड़ 18 लाख लोग विदेश जाने के कतार में रहते है लेकिन इनमें से केवल 32 लाख ही यह स्वीकार करते है कि उनकी आमदनी 10 लाख से ज्यादा है, इसका सीधा मतलब यहीं है कि काफी संख्या में लोग है जो यह नहीं बताते कि मेरी आमदनी 10 लाख से ज़्यादा है। इसी कारण सीए के लोगों को संबोधित करते हुए पीएम ने बार-बार यह कटाक्ष भी किया कि आप लोग अपने बही को सही करें तभी देश के अंदर अर्थ सुधार का बिगुल बज सकता है, नहीं तो फिर देश की अर्थव्यवस्था लड़खड़ा जाएगी। *****************************************नीरज कुमार पाठक नोएडा

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