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सेना का जबाब

Posted On: 31 May, 2017 में

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जम्मू-कश्मीर भारत का वह राज्य है जो कभी भी शांति में नही रहा, इसका इतिहास ही मारकाट और आतंक से परिपूर्ण रहा है। पड़ोसी देशों की आँख भी इस राज्य पर हमेशा रही है जिसके लिए इसने कई युद्ध भी इस राज्य ने देखा है फिर भी यहां की पहाड़ियों की सुंदरता निहारने के लिए दूर- दूर से पर्यटक आते रहते है, प्रकृति की सुंदरता के अलावा भी लोग आतंक की साया के बीच में जीवन-यापन कर रहे है। इसी कश्मीर में कुछ देशद्रोही विचारधारा के लोग ऐसे भी है जो सेना की कार्रवाई में अवरोध उत्पन्न करते है और सेना की अगर आतंकियों से मुठभेड़ होती है तो ये पत्थरबाज़ी की कला दिखाते है, और कभी-कभी ऐसे में मौके का फायदा उठा आतंकी भाग जाते है। कुछ ऐसे ही एक घटनाक्रम में कुछ पत्थरबाज सेना के ऊपर पत्थर बरसा रहे थे तो जब सेना को इससे बचने का कोई उपाय नहीं सुझा तो सेना ने एक पत्थरबाज को पकड़ा और उसको जीप के बोनट पर बांध दिया और यह काम किया भारतीय सेना के मेजर लीथल गोगोई ने , जो कश्मीर में ही तैनात है। गोगोई ने अगर इस पत्थरबाज को जीप में बांधा तो इसका मतलब ये नहीं था की वह उसको दुश्मनी में बाँध रहे थे बल्कि उनका मकसद सिर्फ ये था कि उन पत्थरबाजो के अंदर एक तरह से भय पैदा किया जाय जिससे कि वह अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ सके, क्योकि ये पत्थरबाज उन लगातार सेना, पुलिसकर्मियों और चुनावी दल पर पत्थर बरसा रहे थे, अब अगर गोगोई के द्वारा यह प्रक्रिया नही अपनाई जाती तो उस समय स्थिति भयावह हो सकती थी, इसलिए इस वीर मेजर ने वही किया जिसकी उस समय मांग थी, और हुआ भी वही उस पत्थरबाज को जीप पर बंधा देख पत्थरबाज़ी बन्द हो गयी। जबकि सेना के इस कार्रवाई का कुछ लोगो ने विरोध भी किया था, कि सेना ने मानवाधिकारों का उलंघन किया और ऐसा नही करना चाहिये था, लेकिन उस समय वही एक विकल्प था। आज स्थिति ये है कि कश्मीर के पत्थरबाज हर समय सेना के ऊपर पत्थर बरसाते रहते है लेकिन सेना खामोश पड़ी रहती है बस इसलिये कि ये भी अपने देश के निवासी है और इनके साथ कड़ाई से पेश नहीं आया जा सकता, लेकिन सेना के इस छूट का पत्थरबाज गलत अर्थ निकालते है और इसको सेना की कमज़ोरी समझते है इनको ये नही पता कि भारतीय सेना अगर अपने शौर्य का प्रदर्शन करने लगे तो उसी दिन पत्थरबाजी रुक जाएगी ,और इन पाक के पालतू लोगों का पत्थर फेंकना भूल जाएगा लेकिन अब सेना को यही चाहिए कि इन पत्थरबाजो से कड़ाई से निपटे, और उनको उचित जबाब दे जो सेना के मिशन को कामयाब नही होने देते ।।। *****************************************नीरज कुमार पाठक नोयडा

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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

NirajKumar के द्वारा
June 2, 2017

जय श्री राम ,अग्रवाल जी लेख को सुंदर लिखने में आप बड़ो का आशिर्वाद प्रमुख कारण रहता है जिसके वजह से यह मुमकिन हुआ है। जहां तक हम भारतीय सेना की बात करे तो हमारी सेना इतनी कमजोर नही है कि वह पत्थर खाएं लेकिन कुछ मजबूरी कह ले या नेताओ की नेतागिरी।


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