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चुनावी पूर्वसंध्या का प्रेम

Posted On: 31 Dec, 2016 में

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सरकारें कोई भी हो उनको जनता की याद तभी आती है जब चुनावी बादल देश के अंदर मंडराने के आसार होने लगते है,और जनता को तब यह विश्वास होने लगता है कि अब चुनावी बारिश का मौसम आ गया है ,और उसके बाद जगह-जगह बरसाती मेंढक की तरह नेता अपने-अपने भाषा में जनता को आवाज़ देकर आकर्षित करने की कोशिश करते है, क्योंकि राजनेताओं के लिए यही उचित समय रहता है जब जनता को अपने शारीरिक रंग से मोहित करने पर विवश कर देते है, राजनेताओं के दिमाग में यह सवाल हमेशा घूमता रहता है की अगर इन चुनावी बरसाती मौसम में सफल नही हुए तो कम से कम पांच साल के लिए कुर्सी से हाथ धोना पड़ सकता है, क्योंकि जो काम पांच सालों के अंदर नही हो पाया वो अकस्मात् इन्द्र देव की कृपा से कैसे हो सकता है। जब कोई राजनेता पांच साल के अंदर अपने क्षेत्र में काम नही कर पाता तो वह चुनावी समय में किस मुंह से जनता के पास जाएं,फिर भी अपनी कमी को छिपाने के लिए विधायक या सांसद चुनाव के एक-दो महीने पहले ही अपने क्षेत्र में काम जोर-शोर से शुरू करवा देते है जिससे कि मतदाताओं पर मनोबैज्ञानिक रूप से दबाव बनाया जा सकें और उससे मतदाता को आकर्षित किया जा सके। राजनेताओं की सोच यही होती है कि जनता को काम दिखें जिससे मुझे वोट दे, और फिर मैं वोट लेकर चुनाव को जितने की कोशिश करूं और अगर चुनाव जीतने में सफल हो गया तो पांच साल के लिए चैन की बंसी बजाऊँगा। अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि हमारी सरकारें तभी क्यों आँखे खोलती है जब चुनाव बिल्कुल सिर पर आ जाता है, तभी सब कामों की याद आती है कि किसको आरक्षण देना है , किसको अनुसूचित जाति में रखना है तो किसको पिछड़ी जाति में रखना है। किसको कितने प्रतिशत आरक्षण की पेसकश करनी है। ये सब जितनी भी बातें होती है सब की सब चुनावी महासंग्राम की शंखनाद पर ही क्यों होती है। आज के समय में मतदाताओं को अपने तरफ आकर्षित करने के लिए राजनेता लोग बहुत आसानी से अपने जाल में फ़सा लेते है,अब वह चाहे रुपया हो या फिर मद्यपान । दोनों ही तरीकों से मतदाता का लुभाया जाता है , और कुछ मतदाता इनके लालच में आ जाते है जिसके वजह से वह अपने वोट का सही उपयोग नहीं कर पाते,और वह वोट बिना मतलब हो जाता है। इसलिए हर मतदाता को इस बात का ध्यान हमेशा देना चाहिये कि हमारा वोट सही उम्मीदवार को ही मिले। दूसरी बात ये है कि चुनाव पूर्व सरकार का या किसी मंत्री के प्रेम से भी सजग रहना चाहिये। ********************************************************************************** नीरज कुमार पाठक नोएडा *****************************************

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